FET या JFET (जंक्शन फील्ड इफैक्ट ट्रांसिस्टर) एक तीन सिरो वाली यूनिपोलर (Unipolar) ठोस अवस्था (Solid state) युक्ति है। इस ट्रांसिस्टर में ड्रेन करंट का नियंत्रण निर्वात ट्यूब की भांति वैधुतिक क्षेत्र के द्वारा किया जाता है।
संरचना– FET को N- चैनल अथवा P- चैनल चिप पर बनाया जाता है परन्तु N-चैनल चिप को वरीयता प्रदान की जाती है । N-चैनल FET बनाने के लिए N-प्रकार के अर्द्धचालक की एक पतली छड़ ली जाती है।इस छड़ के मध्य में दो विपरीत पाश्व्रो पर P- प्रकार के जंक्शन डिफ्यूज (Diffuse) कर दिये जाते है
P- चैनल FET की संरचना, N- चैनल FET के समान होती है, अन्तर केवल यह होता है कि इसमें P- प्रकार की छड़ और N- प्रकार के जंक्शन प्रयोग किये जाते है।
कार्य प्रणाली– N–चैनल FET में, सोर्स को बैटरी के ऋण सिरे तथा ड्रेन को बैट्री के धन सिरे से संयोजित किया जाता है। इसमें गेट सिरे को सदैव रिवर्स–बायस स्थिति में रखा जाता है अर्थात इसमे गेट को ऋणात्मक रखा जाता है। जब VGSमान शून्य हो और VDSका मान भी शून्य हो तो ड्रेन ID का मान भी शून्य होता है। VDS का मान शून्य से ऊपर बढ़ाने पर ड्रेन करंट IDरैखिक व्यवहार (Linear manner) में प्रवाहित होने लगती है
(जबकि VGS का मान अभी भी शून्य है) यह करंट, शून्य गेट वोल्टेज ड्रेन करंट कहलाती है। करंट IDका नियंत्रण गेट वोल्टेज (-ve) द्वारा सम्पन्न होता है। इस ट्रांसिस्टर में करंट के प्रवाह में केवल एक ही प्रकार के आवेश वाहक भाग लेते है (N-चैनल में मुक्त इलैक्ट्रॉन्स तथा P- चैनल में होल्स) इसीलिये यह युक्ति यूनिपोलर युक्ति कहलाती है।
फील्ड इफैक्ट ट्रांसिस्टर के लाभ :
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