Electrical

DG (Diesel Generator) का Working Principle (कार्य करने का सिद्धांत)

डीजल जनरेटर (DG) का कार्य सिद्धांत ऊर्जा के रूपांतरण पर आधारित है: डीजल की रासायनिक ऊर्जा को इंजन दहन द्वारा यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है, और फिर जनरेटर इस यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा (बिजली) में परिवर्तित करता है, जो मुख्य रूप से (Faraday’s Law of Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर काम करता है,

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DG सेट दो मुख्य हिस्सों से मिलकर बना होता है:

1️⃣ डीजल इंजन
2️⃣ अल्टरनेटर (Generator)

  1. डीजल इंजन में डीज़ल ईंधन डाला जाता है।
  2. इंजन में एयर + डीज़ल का दहन (Combustion) होता है।
  3. दहन से इंजन का क्रैंकशाफ्ट घूमता है
  4. क्रैंकशाफ्ट अल्टरनेटर से जुड़ा होता है।
  5. अल्टरनेटर घूमने से मैकेनिकल एनर्जी → इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदल जाती है।
  6. इस तरह DG सेट से बिजली (AC Supply) मिलती है।

DG (डीजल जनरेटर) के कार्य सिद्धांत के मुख्य चरण

  1. Fuel Combustion:

    डीजल इंजन हवा को संपीड़ित (compress) करता है और फिर डीजल को जलाता है. इस प्रक्रिया से उत्पन्न रासायनिक ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदल जाती है

  2. Mechanical Energy:

     इंजन के पिस्टन, क्रैंकशाफ्ट के माध्यम से रोटर (Rotor) को घुमाते हैं, जिससे यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न होती है.

  3. Electricity Generation:

     जनरेटर का रोटर (जिसमें फील्ड वाइंडिंग होती है) घूमता है, और यह स्टेटर (Stator) में रखी आर्मेचर वाइंडिंग के चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) को काटता है. फैराडे के नियम के अनुसार, यह चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन बिजली (विद्युत धारा) उत्पन्न करता है.

  4. Control & Output:

     एक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) इंजन और जनरेटर के संचालन को नियंत्रित करती है, जबकि वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी (आमतौर पर 50 Hz) को बनाए रखा जाता है, और बिजली घरों या अन्य उपकरणों को आपूर्ति की जाती है. 

DG (Diesel Generator) का Working Principle (कार्य करने का सिद्धांत)

 

DG  में कोई बड़ा ब्रेकडाउन न आए उसके लिए DG का A B C D Check

A Check –

  • Battery voltage चेक करते हैं।
  • रेडिएटर में कूलेंट लेवल चेक करते है।
  • डीजल टैंक में डीजल लेवल चेक करते है।
  • DG चलाकर एब्नार्मल साउंड चेक करतेहै।
  • कूलेंट और डीजल के पाइपों में लीकेज चेक करते है
  • इंजिन ऑयल लेवल चेक करते है।
  • Emergency & start बटन चेक करते है।डैमेज नहीं होने चाहिए।
  • DG की सफाई करते है।

B check ( 3 से 6 months या 300 से 350 रनिंग hours)

  • ईंजन कूलिंग ऑयल चेंज करते है।(15W 40)
  • ईंजन कूलिंग ऑयल फिल्टर, फ्यूलफिल्टर, कूलेंट फिल्टर चेंज करते है।
  • Air फिल्टर चेंज करते है
  • रेडिएटर कूलेंट top up करते है।
  • फ्यूल लेवल चेक करते है।कम है तो फ्यूल भरते है।
  • बैटरी हेल्थनेस चेक करते है।
  • Bus bar को tight करते है।
  • DG को क्लीन करते है।

C check (800 से 1500 रनिंग hours या 2- 3 years)

  • बैटरी चेंज करते है।
  • ईंजन ऑयल चेंज करते है।
  • सभी फिल्टर चेंज करते है।
  • रेडिएटर को केमिकल से क्लीन करते है।
  • टर्मिनल डिस्कनेक्ट करके क्लीन करते है। और फिरसे कनेक्ट करते है।
  • DG noise लेवल चेक करते है
    • Residential में 55dB max
    • Commercial में 65dB max
    • Industrial में 75 से 85 max

D check ( 3000 से 5000 रनिंग hours या Above 5 years)

  • DG के सभी पार्ट को खोलते है। ( Piston, Engine, Alternator, Radiator)
  • सभी पार्ट्स की सर्विस करते है।
  • सभी पार्ट को दुबारा से लगाते है।

 

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