DG (Diesel Generator) का Working Principle (कार्य करने का सिद्धांत)
डीजल जनरेटर (DG) का कार्य सिद्धांत ऊर्जा के रूपांतरण पर आधारित है: डीजल की रासायनिक ऊर्जा को इंजन दहन द्वारा यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है, और फिर जनरेटर इस यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा (बिजली) में परिवर्तित करता है, जो मुख्य रूप से (Faraday’s Law of Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर काम करता है,
1️⃣ डीजल इंजन
2️⃣ अल्टरनेटर (Generator)
डीजल इंजन हवा को संपीड़ित (compress) करता है और फिर डीजल को जलाता है. इस प्रक्रिया से उत्पन्न रासायनिक ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदल जाती है
इंजन के पिस्टन, क्रैंकशाफ्ट के माध्यम से रोटर (Rotor) को घुमाते हैं, जिससे यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न होती है.
जनरेटर का रोटर (जिसमें फील्ड वाइंडिंग होती है) घूमता है, और यह स्टेटर (Stator) में रखी आर्मेचर वाइंडिंग के चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) को काटता है. फैराडे के नियम के अनुसार, यह चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन बिजली (विद्युत धारा) उत्पन्न करता है.
एक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) इंजन और जनरेटर के संचालन को नियंत्रित करती है, जबकि वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी (आमतौर पर 50 Hz) को बनाए रखा जाता है, और बिजली घरों या अन्य उपकरणों को आपूर्ति की जाती है.
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