Varistor,LDR रेसिस्टर

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Varistor,LDR रेसिस्टर

 

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वैरिस्टर (Varistor)

वैरिस्टर भी विशेष प्रकार का रेसिस्टर है और यह निम्न दो प्रकार का होता है।

 

Varistor,LDR रेसिस्टर
VDR रेसिस्टर

 

 

1 – Symmetrical Varistor

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इनका निर्माण कार्बाइड चूर्ण से सैरामिक बाइन्डर पदार्थ की सहायता से किया जाता है । इसकी विशेषता यह है कि इसके रेसिस्टेन्स मान का निर्धारण इसमे से बहने वाली करंट करती है। कम करंट पर इसका मान अधिक और अधिक करंट पर इसका मान कम होता है।

क्योंकि किसी सर्किट में होने वाला करंट प्रवाह सप्लाई वोल्टेज के समानुपाती होता है। अतः इस रेसिस्टेन्स को कुछ  वोल्ट के घटाव-बढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है । इसे VDR (Voltage Dependent Resistor) के नाम से भी जाना जाता है।VDR वोल्टेज के असामान्य परिवर्तनों को नियंत्रित कर देता है

 

2- Un-symmetrical Varistor

 

यह सेमी कन्डक्टर पदार्थ से बनाया जाता है। इसकी विशेषता यह है की इसमे से प्रवाहित होने वाली करंट का मान करंट प्रवाह की दिशा से नियंत्रित होता है इसीलिए इसे वैरिस्टर डायोड भी कहते है। और इसका उपयोग कुछ सिर्किट में रेक्टिफायर के रूप में भी किया जाता है।

 

 

5- LDR रेसिस्टर ( Light Dependent Resistor)

 – इसका निर्माण सिलीनियम से किया जाता है । इसकी विशेषता यह है कि प्रकाश किरणों के आपतन से इसका रेसिस्टेन्स मान घट जाता है और इसमें से प्रवाहित होने वाली करंट का मान बढ़ जाता है ।

दूसरे शब्दो में यह प्रकाश सुग्राही रेसिस्टर ( Photo sensitive resistor) है। इसका उपयोग प्रकाश नियंत्रित कंट्रोल सर्किट्स में किया जाता है। इसके उपयोग से किसी संकरे मार्ग से गुजरने वाले व्यक्तियों की गणना करने वाला यंत्र कार या टार्च के प्रकाश से खुलने

Varistor,LDR रेसिस्टर
LDR रेसिस्टर

वाला दरवाजा सूर्य के प्रकश  में स्वतः बन्द हो जाने एवं अंधकार में स्वतः चालू हो जाने वाली स्ट्रीट लाइट आदि की व्यवस्था की जा सकती है।

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