बाइपोलर ट्रांजिस्टर किसे कहते है?

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नमस्कार  आज की पोस्ट में हम आपको बता रहे है की बाइपोलर ट्रांजिस्टर किसे कहते है और ट्रांजिस्टर कैसे कार्य करता है ट्रांसिस्टर का प्रयोग इलैक्ट्रोनिक्स सर्किट में किस लिए किया जाता है जानने के लिए पढ़े यह पोस्ट। जो मेरे दोस्त इलैक्ट्रोनिक्स सीख रहे है या इलैक्ट्रोनिक्स में अपना भविष्य बनाना चाहते है उनके लिए यह पोस्ट बहुत ही उपयोगी है  इलैक्ट्रोनिक्स की अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहे Electronic Gyan


बाइपोलर ट्रांजिस्टर किसे कहते है।

Transistor एक ऐसा electronic switch है जो Amplification और स्विचिंग का कार्य कर सकता है इसमें कम से कम तीन सिरे होते है जिनमे से एक को बेस दूसरे कलैक्टर तथा तीसरे को एमीटर कहते है सामान्य तौर पर जो transistor हम इस्तेमाल करते है वह बाइपोलर ट्रांसिस्टर कहलाते है बाइपोलर ट्रांजिस्टर दो प्रकार के होते है ।

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ट्रांजिस्टर (Transistor)

जिस प्रकार डायोड वाल्व की खोज के बाद कुछ वर्षों में ही ट्रायोड वाल्व विकसित हो गया था उसी प्रकार P-N संगम की रेक्टिफिकेशन योग्यता सिद्ध हो जाने के बाद ट्रांजिस्टर विकसित हुआ। ट्रायोड की भाँति ही ट्रांजिस्टर का उपयोग भी एम्पलीफिकेशन आदि कार्यो के लिए सफलतापूर्वक किया जाता है।
ट्रांसिस्टर मुख्यतः दो प्रकार के होते है जो P-N-P तथा N-P-N कहलाते है P-N-P ट्रांसिस्टर में दो P-क्षेत्र होते है और उनके बीच एक पतला N-क्षेत्र होता है। इसी प्रकार N-P-N ट्रांजिस्टर  में दो N-क्षेत्र होते है और उनके बीच एक पतला P-क्षेत्र होता है ट्रायोड के समतुल्य, ट्रांसिस्टर के इलैक्ट्रोड्स P-N-P तथा N-P-N ट्रांसिस्टर्स के प्रतीक निम्न प्रकार होते है
  1.   एमीटर (Emitter) = कैथोड (Cathode)
  2.   बेस (Base)= कन्ट्रोल ग्रिड (Control grid)
  3.   कलैक्टर (Collector)= एनोड (Anode)
बाइपोलर ट्रांजिस्टर किसे कहते है।
PNP Transistor NPN Transistor

 

 

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बाइपोलर तथा यूनिपोलर ट्रांसिस्टर्स ( Bipolar and Unipolar Transistors) P-N-P तथा N-P-N दोनों ही प्रकार के ट्रांसिस्टर्स में करंट चालन, होल्स तथा मुक्त इलैक्ट्रॉन्स (Free electrons) के द्वारा सम्पन्न होते है अतः इन्हे बाइपोलर ट्रांजिस्टर भी कहते है। इसके विपरीत यूनिपोलर (Unipolar) ट्रांसिस्टर में करंट चालन केवल एक प्रकार के आवेश वाहकों (Charge carriers) द्वारा सम्पादित होता है।
जर्मेनियम तथा सिलिकॉन ट्रांसिस्टर ट्रांसिस्टर्स के निर्माण में मुख्यतः जर्मेनियम तथा सिलिकॉन (Germanium and Silicon) नामक अर्द्ध चालक प्रयोग किये जाते है। जर्मेनियम ट्रांसिस्टर्स की अपेक्षा सिलिकॉन ट्रांसिस्टर अधिक उपयोगी है।

 

 

1- सिलिकॉन ट्रांसिस्टर्स, जर्मेनियम ट्रांसिस्टर्स की अपेक्षा अधिक तापमान पर कार्य कर सकते है क्योंकि सिलिकॉन की ऊष्मा विकिरण क्षमता, जर्मेनियम से अधिक होती है।
2- सिलिकॉन ट्रांसिस्टर, जर्मेनियम ट्रांसिस्टर की अपेक्षा अधिक करंट वहन कर सकता है यह अधिक पावर पर कार्य करता है, क्योकि सिलिकॉन का एनर्जी गैप (energy gap) अधिक होता है।

3- सिलिकॉन की प्रतिरोधकता अधिक होती है

 


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